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हॉब्स के व्यक्तिवाद संबंधी विचार/ Hobbes's views on individualism || By Nirban P K Yadav Sir || In Hindi

 हॉब्स के व्यक्तिवाद संबंधी विचार-

  • हॉब्स संप्रभुता का कट्टर समर्थक (निरंकुशतावादी) होते हुए भी, कई कारणों से व्यक्तिवादी था| 

  • व्यक्तिवाद की मूल धारणा यह है कि जितने भी संघ, समुदाय, अन्य संस्थाएं व राज्य हैं, वह सब व्यक्तियों द्वारा निर्मित हैं, व्यक्ति ही उनकी इकाई हैं और ये सब अपने में सम्मिलित व्यक्तियों से अधिक या भिन्न कुछ भी नहीं है| 


  • निम्न कारण है, जो हॉब्स को व्यक्तिवादी बनाते हैं-

  1. हॉब्स प्रथम मनोवैज्ञानिक व्यक्तिवादी है, जिसके राजदर्शन की शुरुआत व्यक्ति से होती है तथा व्यक्ति उसके चिंतन का केंद्र है|

  2. वह राज्य को कृत्रिम मानता है|

  3. वह राज्य को साधन मानता है वह व्यक्ति सुरक्षा को साध्य मानता है|

  4. वह व्यक्ति के जीवन के अधिकार को संप्रभुता से ऊपर मानता है|


  • इस तरह हॉब्स का दर्शन उपयोगितावाद से भी जुड़ा है|


  • हॉब्स के व्यक्तिवाद पर सेबाइन की टिप्पणी “हॉब्स के चिंतन में व्यक्तिवाद का तत्व पूर्ण रूप से आधुनिक है| इस दृष्टि से हॉब्स ने आगामी युग का संकेत अच्छी तरह से समझ लिया था|”

  • सेबाइन “थॉमस हॉब्स के संप्रभु की सर्वोच्च शक्ति उसके व्यक्तिवाद की आवश्यक पूरक है|”

  • सेबाइन “थॉमस हॉब्स ने एक व्यक्तिवादी के रूप में अपने विचारों का प्रारंभ में प्रतिपादन किया, परंतु उसके विचारों का अंत निरंकुशतावाद में होता है|” 

  • डनिंग “हॉब्स के सिद्धांतों में राज्य शक्ति का उत्कर्ष होते हुए भी मूल आधार पूर्णतः व्यक्तिवादी है|”

  • हॉब्स के चिंतन में व्यक्तिवाद के साथ उपयोगितावाद भी स्पष्ट झलकता है| सेबाइन के शब्दों में “हॉब्स एक साथ पूर्ण उपयोगितावादी तथा पूर्ण व्यक्तिवादी था|”

  • ऑकशॉट “हॉब्स एक उदारवादी या लोकतंत्रवादी नहीं, बल्कि व्यक्तिवादी है|”

  • वेपरलेवियाथन मात्र प्रभुसत्ता के सिद्धांत का शक्तिशाली प्रतिवाद ही नहीं, बल्कि वह उसके व्यक्तिवाद का एक शक्तिशाली व्यक्तव्य भी है|”

  • मैक्सी “निरंकुशतावादी होते हुए भी हॉब्स आदि से अंत तक व्यक्तिवादी है|” 

  • मैक्सी “थॉमस हॉब्स का लेवियाथन केवल संप्रभुता के सिद्धांत का और राज्य को एक साधन के रूप में  मानने का ही ग्रंथ नहीं है, वह व्यक्तिवाद का भी प्रबल समर्थक है|”

  • वोलिन “हॉब्स की रचना लेवियाथन के मुख्य पृष्ठ पर उनके सिद्धांत का सार मिलता है, जिसमें व्यक्तिवाद व शक्तिशाली संप्रभु शासक महत्वपूर्ण तत्व है|” 


स्वत्वमूलक व्यक्तिवाद-

  • C B मैकफर्सन ने अपनी कृति The Political Theory of Possessive Individualism: Hobbes to locke 1962 में थॉमस हॉब्स की विचारधारा को स्वत्व बोध या स्वत्वात्मक व्यक्तिवाद (Possessive Individualism) कहा है|

  • C B मैकफर्सन “हॉब्स में स्वत्वमूलक व्यक्तिवाद (Possessive Individualism), सजातीय गलाकाट प्रतिस्पर्धा, आत्म प्रशंसा के भाव थे| उसके सिद्धांत आरंभिक पूंजीवादी-बाजारवादी राजनीतिक विचारधारा का समर्थन करते हैं|”



राजनीतिक जिम्मेदारियां-

  • लियो स्ट्रास के अनुसार थॉमस हॉब्स शासकों की जिम्मेदारी समझते थे, कि प्रजा उनकी आज्ञा का पालन करें|

  • शासक की आज्ञा पालन के थॉमस हॉब्स तीन कारण बताता है-

  1. यदि व्यक्ति आज्ञा का पालन नहीं करता है, तो उससे दंड दिया जाना चाहिए|

  2. अपने समझौते के पालन के नैतिक कारण है और लेवियाथन इस बात की गारंटी करता है कि सभी पक्ष समझौते का पालन करेंगे|

  3. शासक नागरिकों द्वारा अनुमति प्राप्त उनकी ओर से शासन करने वाला प्रतिनिधि है (सहमति से शासन करने वाला प्रतिनिधि)|

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