1 मई के बाद होर्मुज नाकेबंदी और युद्ध जारी रखना ट्रंप के लिए मुश्किल : वॉर पावर रेगुलेशन एक्ट
1 मई को वॉर पावर रेगुलेशन एक्ट की डेटलाइन खत्म हो रही है, जो ट्रंप के लिए युद्ध जारी रखने तथा होर्मुज नाकेबंदी में मुश्किल पैदा कर सकती है|
वॉर पावर रेगुलेशन एक्ट क्या है-
इसको वॉर पावर एक्ट भी कहा जाता है|
राष्ट्रपति की युद्ध संबंधी शक्तियों पर नियंत्रण के लिए यह एक्ट 1973 में बनाया गया था|
यह कानून वियतनाम युद्ध के बाद बनाया गया था, क्योंकि युद्ध में राष्ट्रपति की शक्तियों को लेकर विवाद हुआ था|
वॉर पावर एक्ट के मुख्य उद्देश्य-
अमेरिका में शक्ति नियंत्रण व संतुलन का सिद्धांत अपनाया गया है|
यह कानून राष्ट्रपति और कांग्रेस (विधायिका) के बीच युद्ध संबंधी शक्ति का संतुलन बनाए रखने के लिए बनाया गया है|
इस कानून का उद्देश्य यह है, कि राष्ट्रपति अकेले लंबे समय तक युद्ध शुरू न कर सके तथा युद्ध के लिए अमेरिकी कांग्रेस की अनुमति आवश्यक हो और सेना भेजने के बाद राष्ट्रपति कांग्रेस को जानकारी दें|
वॉर पावर एक्ट के प्रमुख सावधान-
यदि राष्ट्रपति सेना को युद्ध या संघर्ष में भेजते हैं, तो उन्हें 48 घंटे के भीतर कांग्रेस को सूचित करना आवश्यक है|
बिना कांग्रेस की अनुमति के सेना केवल 60 दिन तक ही तैनात रह सकती है|
60 दिन के अतिरिक्त 30 दिन सेना हटाने के लिए दिए जा सकते हैं|
कांग्रेस चाहे तो सेना की कार्यवाही रोक सकती है|
ट्रंप के लिए मुश्किल-
वॉर पावर एक्ट के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति बिना कांग्रेस (विधायिका) की पूर्व मंजूरी के 60 दिन तक सैन्य अभियान चला सकते हैं|
60 दिनों के बाद युद्ध जारी रखने के लिए या तो कांग्रेस की अनुमति लेनी पड़ती है या सैन्य अभियान को रोकना पड़ता है|
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कार्यवाही 2 मार्च को शुरू की थी तथा 60 दिन की अवधि 1 मई को खत्म हो रही है|
यदि ट्रंप इस डेडलाइन को नजरअंदाज करते हैं, तो कांग्रेस से टकराव व कानूनी चुनौतियां बढ़ेंगी|
ट्रंप के पास विकल्प-
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के पास निम्न विकल्प हैं-
30 दिनों का विस्तार
कांग्रेस से मंजूरी लेना
इग्नोर करना
30 दिनों का विस्तार-
ट्रंप 30 दिन का अतिरिक्त समय सेना को हटाने के लिए और मांग सकते हैं|
कांग्रेस से मंजूरी लेना-
ट्रंप कांग्रेस से युद्ध की औपचारिक मंजूरी ले सकते हैं|
इग्नोर करना-
ट्रंप कानून की अनदेखी कर अभियान जारी रख सकते हैं, जैसाकि ओबामा ने 2011 में लीबिया में किया था|
2011 में लीबिया पर संयुक्त राष्ट्र अनुमोदित हवाई हमले के दौरान ओबामा ने तर्क दिया कि यह कोई सतत संघर्ष नहीं है और इसमें अमेरिकी सेना जमीनी युद्ध में शामिल नहीं है और केवल हवाई हमले कर रही है|

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