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ऑपरेशन वाइप व चुनौतियां (डेथ क्रेसेंट और डेथ ट्रायंगल)

 ऑपरेशन वाइप व चुनौतियां (डेथ क्रेसेंट और डेथ ट्रायंगल)


    ऑपरेशन वाइप क्या है?

    • देश को नशामुक्त बनाने के लिए नक्सलमुक्त भारत की तर्ज पर केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के द्वारा ऑपरेशन वाइप संचालित किया जा रहा| 


    ऑपरेशन वाइप में चुनौतियां-

    • नशे के विरुद्ध अभियान के सामने दो तरह की चुनौतियां है-

    1. अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियां

    2. घरेलू चुनौतियां


    1. अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियां-

    • असली चुनौती उन अंतरराष्ट्रीय कार्टेल्स को ध्वस्त करने की है, जो भारत की सीमाओं के बाहर बैठकर इस अवैध व्यापार को संचालित कर रहे हैं| 

    • भौगोलिक दृष्टि से भारत डेथ क्रेसेंट यानी अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान और डेथ ट्रायंगल यानी म्यांमार-लाओस-थाईलैंड जैसे गलियारों के बीच स्थित है| 

    • मेक्सिको-चीन नार्को रूट भी भारतीय समुद्री मार्ग का उपयोग कर रहे हैं| 


    1. घरेलू चुनौतियां-

    • घरेलू चुनौती में देश में सख्त कानूनों और एजेंसियों की मुस्तैदी के बावजूद भी तस्करी न रुकने का बड़ा कारण इसमें लिप्त तंत्र का डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण तथा भ्रष्टाचार है| 

    • भारत में पंजाब हेरोइन का प्रमुख केंद्र है, गुजरात के समुद्री मार्ग नशे के प्रवेश द्वार हैं और महाराष्ट्र कर्नाटक इसके ट्रांजिट हब है| पूर्वोत्तर राज्य भी नशे के केंद्र बन गए हैं| 

    • इसके अलावा आधुनिक तस्कर डार्कनेट, क्रिप्टोकरंसी और ड्रोन तकनीक का उपयोग कर रहे हैं| 


    समाधान-

    • अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति के स्रोतों को जड़ से काटना होगा| 

    • भारत के उन प्रदेशों पर सख्त निगरानी रखने की जरूरत है, जहां नशे का कारोबार अपने चरम पर है| 

    • अंतर्राष्ट्रीय व घरेलू स्तर पर इसको रोकने की आवश्यकता है| 

    • राष्ट्रीय नशा मुक्ति अभियान को सरकारी मिशन के साथ-साथ एक राष्ट्रीय स्तर पर जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता है|

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