ऑपरेशन वाइप व चुनौतियां (डेथ क्रेसेंट और डेथ ट्रायंगल)
ऑपरेशन वाइप क्या है?
देश को नशामुक्त बनाने के लिए नक्सलमुक्त भारत की तर्ज पर केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के द्वारा ऑपरेशन वाइप संचालित किया जा रहा|
ऑपरेशन वाइप में चुनौतियां-
नशे के विरुद्ध अभियान के सामने दो तरह की चुनौतियां है-
अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियां
घरेलू चुनौतियां
अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियां-
असली चुनौती उन अंतरराष्ट्रीय कार्टेल्स को ध्वस्त करने की है, जो भारत की सीमाओं के बाहर बैठकर इस अवैध व्यापार को संचालित कर रहे हैं|
भौगोलिक दृष्टि से भारत डेथ क्रेसेंट यानी अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान और डेथ ट्रायंगल यानी म्यांमार-लाओस-थाईलैंड जैसे गलियारों के बीच स्थित है|
मेक्सिको-चीन नार्को रूट भी भारतीय समुद्री मार्ग का उपयोग कर रहे हैं|
घरेलू चुनौतियां-
घरेलू चुनौती में देश में सख्त कानूनों और एजेंसियों की मुस्तैदी के बावजूद भी तस्करी न रुकने का बड़ा कारण इसमें लिप्त तंत्र का डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण तथा भ्रष्टाचार है|
भारत में पंजाब हेरोइन का प्रमुख केंद्र है, गुजरात के समुद्री मार्ग नशे के प्रवेश द्वार हैं और महाराष्ट्र कर्नाटक इसके ट्रांजिट हब है| पूर्वोत्तर राज्य भी नशे के केंद्र बन गए हैं|
इसके अलावा आधुनिक तस्कर डार्कनेट, क्रिप्टोकरंसी और ड्रोन तकनीक का उपयोग कर रहे हैं|
समाधान-
अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति के स्रोतों को जड़ से काटना होगा|
भारत के उन प्रदेशों पर सख्त निगरानी रखने की जरूरत है, जहां नशे का कारोबार अपने चरम पर है|
अंतर्राष्ट्रीय व घरेलू स्तर पर इसको रोकने की आवश्यकता है|
राष्ट्रीय नशा मुक्ति अभियान को सरकारी मिशन के साथ-साथ एक राष्ट्रीय स्तर पर जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता है|

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