पश्चिम एशिया संकट GCC की बैठक के दौरान UAE ने ओपेक व ओपेक प्लस छोड़ने का किया एलान
अमेरिकी-ईरान युद्ध के दौरान क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और तेल राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिले है|
इस संघर्ष के दौरान इस्लामिक एकजुटता (इस्लामिक उम्माह की अवधारणा) कमजोर पड़ी है|
इस युद्ध के दौरान अधिकांश पश्चिमी एशियाई देश अमरीकी कार्यवाई के खिलाफ एकजुट नहीं है|
इस दौरान सऊदी अरब- UAE के बीच प्रतिद्वंद्विता और फुट बढी है|
जेद्दा (सऊदी अरब) में GCC की बैठक के दौरान UAE ने ओपेक व ओपेक प्लस छोड़ने का ऐलान कर इस फूट को औपचारिक रूप दे दिया है|
UAE ने इस फैसले को अपनी संप्रभुता और आर्थिक हितों से जोड़ा है तथा इस फैसले को सऊदी वर्चस्व को सीधे चुनौती माना जा रहा है|
GCC क्या है?
OPEC क्या है?
OPEC प्लस क्या है?
GCC क्या है?
पूरा नाम- खाड़ी सहयोग परिषद (Gulf Cooperation Council)
यह संगठन फारस की खाड़ी से घिरे देशो का एक क्षेत्रीय समूह है|
स्थापना- 25 मई 1981
सदस्य देश- 6
सऊदी अरब
UAE
कतर
कुवैत
बहरीन
ओमान
मुख्यालय- रियाद (सऊदी अरब)
बैठक या शिखर सम्मेलन- प्रत्येक वर्ष, राष्ट्राध्यक्ष शामिल होते हैं|
वर्तमान बैठक- 28- 29 अप्रैल 2026, जेद्दा (सऊदी अरब)
OPEC क्या है?
पूरा नाम- Organisation of the Petroleum Exporting Countries (पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन)
यह तेल निर्यात करने वाले देशों का एक स्थायी अंतर सरकारी संगठन है|
इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों की पेट्रोलियम नीतियों का समन्वय करना और तेल बाजार में स्थिरता बनाए रखना है|
स्थापना- 14 सितंबर 1960, बगदाद (इराक)
मुख्यालय- वियना (ऑस्ट्रिया)
संस्थापक देश- 5
ईरान
इराक
कुवैत
सऊदी अरब
वेनेजुएला
वर्तमान सदस्य देश- 12
7 नए सदस्य देश-
अल्जीरिया
इक्वेटोरियल गिनी
गैबॉन
लीबिया
नाइजीरिया
कांगो गणराज्य
UAE (अलगाव की घोषणा)
OPEC प्लस क्या है?
स्थापना- 2016
इसकी स्थापना 2016 में तेल की कीमतों को स्थिर करने के लिए की गई थी|
मुख्यालय- वियना (ऑस्ट्रिया)
OPEC+ में OPEC के सदस्यों के अतिरिक्त 10 अन्य देश शामिल है-
अज़रबैजान
बहरीन
ब्रुनेई
कज़ाखस्तान
मलेशिया
मैक्सिको
ओमान
रूस
दक्षिण सूडान
सूडान

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