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अनुच्छेद 19 वाक्- स्वातंत्र्य आदि विषयक कुछ अधिकारों का संरक्षण

    अनुच्छेद 19 वाक्- स्वातंत्र्य आदि विषयक कुछ अधिकारों का संरक्षण


    • 19(1) मे छ: स्वतंत्रताओ का उल्लेख है|

    • 19(2)- 19(6) तक इन स्वतंत्रताओ पर लगाए जाने वाले युक्तियुक्त निर्बन्धनों के आधारों का उल्लेख है| 

    • इन 6 स्वतंत्रताओ की रक्षा केवल राज्य के खिलाफ है, न कि निजी मामलों में| 


    19(1) सभी नागरिकों को-

    • (क) वाक्-स्वांतत्र्य और अभिव्यक्ति स्वांतत्र्य का,

    • (ख) शांतिपूर्वक और निरायुद्ध सम्मेलन का,

    • (ग) संगम या संघ या सहकारी समिति बनाने का,

    • (घ) भारत के राज्य क्षेत्र में सर्वत्र अबाध संचरण का,

    • (ड) भारत के राज्य क्षेत्र के किसी भाग में निवास करने और बस जाने का,और 

    • (च) हटा दिया गया

    • (छ) कोई वृत्ति, उपजीविका, व्यापार या कारोबार करने का अधिकार होगा|


    • Note- 19(1)(ग) मे सहकारी समिति शब्द 97वें संशोधन अधिनियम 2011 के द्वारा 12-1-2012 से जोड़ा गया|

    • Note- 19(1)(च) संपत्ति को खरीदने, अधिग्रहण करने या बेच देने की स्वतंत्रता को 44 वें संशोधन 1978 की धारा 2 के द्वारा समाप्त कर दिया गया| अर्थात मूल सविधान में 7 स्वतंत्रताए थी|



    अनुच्छेद 19(1)(क)- वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता-

    • सभी नागरिको को बोलने का, स्वयं या दूसरे व्यक्ति के विचारों को अभिव्यक्त (लिखित या मौखिक रूप में) करने का, सरकार की लिखित, मौखिक या सांकेतिक आलोचना करने का अधिकार है|

    • SC ने वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में निम्न को शामिल किया है- 

    1. प्रेस की स्वतंत्रता- बृजभूषण मामला (संविधान सभा के सदस्य KT शाह ने प्रेस की स्वतंत्रता को अनुच्छेद 19(1) के अंतर्गत शामिल किए जाने का समर्थन किया था|

    2. व्यवसायिक विज्ञापन की स्वतंत्रता- टाटा प्रेस मामला

    3. प्रसारित करने का अधिकार अर्थात सरकार का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर एकाधिकार नहीं है- क्रिकेट एसोसिएशन मामला

    4. तिरंगा फहराने का अधिकार- नवीन जिंदल

    5. सूचना का अधिकार- SP गुप्ता

    6. फिल्म निर्माण का अधिकार- फिल्म फेस्टिवल 

    7. प्रदर्शन या विरोध का अधिकार 

    8. फोन टैपिंग के विरुद्ध अधिकार 

    9. इंटरनेट के माध्यम से वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा कोई वृति, उपजीविका व्यापार या कारोबार करने का अधिकार 19(1) के तहत व्यक्ति का संवैधानिक अधिकार है- अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ वाद 2020

    10. उम्मीदवार के बारे में सूचना तथा नोटा का अधिकार- पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज बनाम भारत संघ वाद 2003


    • Note- हड़ताल व बंद का अधिकार 19(1)(क) के अंतर्गत नहीं आता है|


    19 (1)(क) पर प्रतिबंध-

    • यह स्वतंत्रता आत्यंतिक नहीं है, इस पर अनु.19(2) में युक्तियुक्त निर्बन्धनों का उल्लेख है| 


    • अनुच्छेद 19(2)- खंड (1) के उपखंड (क) की कोई बात उक्त उपखंड द्वारा दिए गए अधिकार के प्रयोग पर भारत की प्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों, लोक व्यवस्था, शिष्टाचार या सदाचार के हितों में अथवा न्यायालय-अवमान, मानहानि या अपराध-उद्दीपन के संबंध में युक्तियुक्त निर्बंधन जहां तक कोई विद्यमान विधि अधिरोपित करती है वहां तक उसके प्रवर्तन पर प्रभाव नहीं डालेगी या ऐसे निर्बंधन अधिरोपित करने वाली कोई विधि बनाने से राज्य को निवारित नहीं करेगी। 


    व्याख्या-

    • अनु.-19(2) के अनुसार, अनु.-19(1) (क) पर निम्न 8 आधार पर युक्तियुक्त निर्बन्धन कोई विद्यमान विधि अधिरोपित करती है या राज्य विधि बनाकर लगा सकता है-

    1. भारत की प्रभुता और अखंडता

    2. राज्य की सुरक्षा

    3. विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध

    4. लोक व्यवस्था 

    5. शिष्टाचार व सदाचार के हितों में 

    6. न्यायालय अवमान

    7. मानहानि

    8. अपराध- उद्दीपन 


    • Note- प्रथम संविधान संशोधन 1951 के द्वारा इन प्रतिबंधों के तीन आधार शामिल किए गए-1 विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध, 2 लोक व्यवस्था, 3 अपराध उद्दीपन

    • Note-16 वें संविधान संशोधन 1963 के द्वारा भारत की प्रभुता और अखंडता शब्द जोड़े गए| 

    • अनुच्छेद 19 (2) के तहत मूल संविधान में युक्तियुक्त निर्बन्धन शब्द का उल्लेख नहीं था| इसे प्रथम संविधान संशोधन 1951 द्वारा जोड़ा गया| यद्यपि अनुच्छेद 19 (3),(4),(5),(6) में युक्तियुक्त निर्बन्धन शब्द संविधान लागू होने के दिन से ही उल्लेखित है| 


    • चारुलता जोशी वाद 1999- प्रेस की स्वतंत्रता का अधिकार आत्यंतिक नहीं है, कैदी का साक्षात्कार नहीं लिया जा सकता| 

    • अरुंधति राय वाद 2002- न्यायालय की गरिमा की रक्षा के लिए वाक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाई जा सकती है|



    अनुच्छेद 19(1)(ख)- शांतिपूर्वक और निरायुद्ध सम्मेलन की स्वतंत्रता-

    • यह अनुच्छेद सभी नागरिकों को शांतिपूर्वक और बिना युद्ध की भावना के सम्मेलन करने का अधिकार प्रदान करता है|

    • इस स्वतंत्रता का प्रयोग सार्वजनिक भूमि पर बिना हथियार के किया जा सकता है| 


    • Note- अपराधिक व्यवस्था की धारा 144 (1973) के अंतर्गत न्यायालय किसी संगठित बैठक को किसी व्यवधान के खतरे के आधार पर रोक सकता है|

    • Note- भारतीय दंड संहिता की धारा- 141 के तहत पांच या उससे अधिक लोगों का संगठन निम्न मामलों में गैर कानूनी हो सकता है-

    1. किसी कानूनी प्रक्रिया का अवरोध हो| 

    2. कुछ लोगों की संपत्ति पर बलपूर्वक कब्जा हो|

    3. किसी अपराधिक कार्य की चर्चा हो|

    4. किसी व्यक्ति पर गैरकानूनी काम के लिए दबाव डालना| 

    5. सरकार या उसके कर्मचारियों को उनकी विधायी शक्तियों के प्रयोग हेतु धमकाना| 


    19(1)(ख) पर प्रतिबंध-

    • यह स्वतंत्रता आत्यंतिक नहीं है, इस पर अनु.19(3) मे युक्तियुक्त निर्बन्धनों का उल्लेख है| 


    • अनुच्छेद 19(3)- उक्त खंड के उपखंड (ख) की कोई बात उक्त उपखंड द्वारा दिए गए अधिकार के प्रयोग पर भारत की प्रभुता और अखंडता या लोक व्यवस्था के हितों में युक्तियुक्त निर्बंधन जहां तक कोई विद्यमान विधि अधिरोपित करती है वहां तक उसके प्रवर्तन पर प्रभाव नहीं डालेगी या ऐसे निर्बंधन अधिरोपित करने वाली कोई विधि बनाने से राज्य को निवारित नहीं करेगी| 


    व्याख्या-

    • अनु.-19(3) के अनुसार, अनु.-19(1)(ख) पर निम्न 2 आधारों पर युक्तियुक्त निर्बन्धन विद्यमान विधि अधिरोपित करती है या राज्य विधि बनाकर लगा सकता है-

    1. भारत की प्रभुता और अखंडता,

    2. लोक व्यवस्था के हित में


    • Note-16 वें संविधान संशोधन 1963 के द्वारा भारत की प्रभुता और अखंडता शब्द जोड़े गए| 



    अनुच्छेद 19(1)(ग)- संगम या संघ या सहकारी समितियां बनाने का अधिकार-

    • इसके अंतर्गत सभी नागरिकों को राजनीतिक दल बनाने, कंपनी, साझा फर्म, समितियां, क्लब, व्यापार संगठन, सहकारी समितियां आदि बनाने का अधिकार प्रदान किया गया है|


    19(1)(ग) पर प्रतिबंध-

    • यह स्वतंत्रता आत्यंतिक नहीं है, इस पर अनु.19(4) मे युक्तियुक्त निर्बन्धनों का उल्लेख है| 


    • अनुच्छेद 19(4)- उक्त खंड के उपखंड (ग) की कोई बात उक्त उपखंड द्वारा दिए गए अधिकार के प्रयोग पर भारत की प्रभुता और अखंडता या लोक व्यवस्था या सदाचार के हितों में युक्तियुक्त निर्बंधन जहां तक कोई विद्यमान विधि अधिरोपित करती है वहां तक उसके प्रवर्तन पर प्रभाव नहीं डालेगी या ऐसे निर्बंधन अधिरोपित करने वाली कोई विधि बनाने से राज्य को निवारित नहीं करेगी| 


    व्याख्या-

    • अनु.-19(4) के अनुसार, अनु.-19(1)(ग) पर निम्न 3 आधारों पर युक्तियुक्त निर्बन्धन विद्यमान विधि अधिरोपित करती है या राज्य विधि बनाकर लगा सकता है-

    1. भारत की प्रभुता और अखंडता

    2. लोक व्यवस्था

    3. सदाचार के हित में| 


    • Note-16 वें संविधान संशोधन 1963 के द्वारा भारत की प्रभुता और अखंडता शब्द जोड़े गए|



    अनुच्छेद 19(1)(घ)- संचरण की स्वतंत्रता- 

    • यह सभी नागरिकों को भारत के राज्य क्षेत्र मे कहीं भी या सर्वत्र अबांध संचरण (आने जाने की) या भ्रमण  की स्वतंत्रता प्रदान करता है| इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सोच को बढ़ावा देना है न कि संकीर्णता को|


    अनुच्छेद 19(1)(ड)- निवास या बस जाने का अधिकार-

    • यह सभी नागरिकों को भारत के राज्य क्षेत्र में किसी भी भाग में स्थायी या अस्थायी रूप से बस जाने का अधिकार प्रदान करता है|


    19(1)(घ) व (ड) पर प्रतिबंध-

    • अनुच्छेद 19(5) इन दोनों स्वतंत्रताओ पर पर युक्तियुक्त निर्बंधन लगाता है| 


    • अनुच्छेद 19(5)- उक्त खंड के उपखंड (घ) और उपखंड (ङ) की कोई बात उक्त उपखंडों द्वारा दिए गए अधिकारों के प्रयोग पर साधारण जनता के हितों में या किसी अनुसूचित जनजाति के हितों के संरक्षण के लिए युक्तियुक्त निर्बंधन जहां तक कोई विद्यमान विधि अधिरोपित करती है वहाँ तक उसके प्रवर्तन पर प्रभाव नहीं डालेगी या ऐसे निर्बंधन अधिरोपित करने वाली कोई विधि बनाने से राज्य को निवारित नहीं करेगी| 


    व्याख्या-

    • अनुच्छेद 19(5) के अनुसार, अनु.-19(1)(घ) व अनु.-19(1)(ड़) पर निम्न 2 आधारों पर युक्तियुक्त निर्बन्धन विद्यमान विधि अधिरोपित करती है या राज्य विधि बनाकर लगा सकता है-

    1. साधारण जनता के हितों के संरक्षण,

    2. अनुसूचित जनजाति के हितों के संरक्षण 


    • Note- S.C के अनुसार वेश्या के संचरण पर सार्वजनिक नैतिकता एवं स्वास्थ्य के आधार पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है|

    • Note- बम्बई उच्च न्यायालय ने एड्स पीड़ित व्यक्ति के संचरण पर प्रतिबंध को वैध ठहराया है|

    • Note- S.C ने पेशेवर अपराधी के घूमने पर प्रतिबंध लगाया हैं|



    अनुच्छेद 19(1) (छ)- कारोबार की स्वतंत्रता-

    • यह सभी नागरिकों को कोई भी वृत्ति, उपजीविका, व्यापार, कारोबार करने का अधिकार प्रदान करता है|


    प्रतिबंध-

    • यह आत्यंतिक नहीं है| इस पर अनु.19(6) में युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाये गये हैं| 


    • अनुच्छेद 19(6)- उक्त खंड के उपखंड (छ) की कोई बात उक्त उपखंड द्वारा दिए गए अधिकार के प्रयोग पर साधारण जनता के हितों में युक्तियुक्त निर्बंधन जहाँ तक कोई विद्यमान विधि अधिरोपित करती है वहाँ तक उसके प्रवर्तन पर प्रभाव नहीं डालेगी या वैसे निर्बंधन अधिरोपित करने वाली कोई विधि बनाने से राज्य को निवारित नहीं करेगी और विशिष्टतया उक्त उपखंड की कोई बात-

    1. कोई वृत्ति, उपजीविका, व्यापार या कारोबार करने के लिए आवश्यक वृत्तिक या तकनीकी अर्हताओं से, या

    2. राज्य द्वारा या राज्य के स्वामित्व या नियंत्रण में किसी निगम द्वारा कोई व्यापार, कारोबार, उद्योग या सेवा, नागरिकों का पूर्णतः या भागतः अपवर्जन करके या अन्यथा, चलाए जाने से,

    जहाँ तक कोई विद्यमान विधि सम्बन्ध रखती है वहाँ तक उसके प्रवर्तन पर प्रभाव नहीं डालेगी या इस प्रकार सम्बन्ध रखने वाली कोई विधि बनाने से राज्य को निवारित नहीं करेगी| 


    व्याख्या-

    • अनु.-19(6) के अनुसार, अनु.-19(1)(छ) पर निम्न आधारों पर युक्तियुक्त निर्बन्धन विद्यमान विधि अधिरोपित करती है या राज्य विधि बनाकर लगा सकता है-

    1. साधारण जनता के हितों में| 

    2. विशिष्टतया-

    1. किसी वृत्ति, उपजीविका, व्यापार या कारोबार के लिए पेशेगत या तकनीकी योग्यता आवश्यक की जा सकती है|

    2. राज्य किसी व्यापार, कारोबार, उद्योग या सेवा को पूर्णत: या भागत: अपने लिए या राज्य के स्वामित्व या नियंत्रण में किसी निगम के लिए आरक्षित कर सकता है|


    • इन सभी छ: स्वतंत्रताओ पर युक्तियुक्त प्रतिबंध राज्य (अनुच्छेद 12 में परिभाषित राज्य) विधि बनाकर लगा सकता है|


    • ये सभी स्वतंत्रताए असीमित या निर्बधन रहित नहीं है|


    • मताधिकार एक संवैधानिक अधिकार नहीं है|- कुलदीप नैयर बनाम यूनियन ऑफ इंडिया वाद  2007

     



    Notes available for RPSC School lecturers and UGC-Net Political Science Subject 9660895656

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