अनुच्छेद- 9 विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से अर्जित करने वाले व्यक्तियों का नागरिक न होना-
यदि किसी व्यक्ति ने किसी विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से अर्जित कर ली है तो वह अनुच्छेद 5 के आधार पर भारत का नागरिक नहीं होगा अथवा अनुच्छेद 6 या अनुच्छेद 8 के आधार पर भारत का नागरिक नहीं समझा जाएगा|
व्याख्या-
यह अनुच्छेद दूसरे देश की नागरिकता स्वेच्छा से अर्जित करने वाले व्यक्तियों के नागरिकता के प्रावधान करता है|
यदि किसी व्यक्ति ने दूसरे देश की नागरिकता स्वेच्छा से ग्रहण कर ली है तो वह अनुच्छेद 5, अनुच्छेद 6, अनुच्छेद 8, के आधार पर भारत का नागरिक नहीं समझा जाएगा|
अनुच्छेद- 10 नागरिकता के अधिकारों का बना रहना-
प्रत्येक व्यक्ति, जो इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में से किसी के अधीन भारत का नागरिक है या समझा जाता है, ऐसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, जो संसद द्वारा बनाई जाए, भारत का नागरिक बना रहेगा|
व्याख्या-
प्रत्येक व्यक्ति जो अनुच्छेद 5, 6, 7, 8, 9 के अंतर्गत भारत का नागरिक है या समझा जाता है, संसद के द्वारा बनायी गयी विधियों के अधीन रहते हुए ही भारत का नागरिक बना रहेगा|
अनुच्छेद- 11 संसद द्वारा नागरिकता के अधिकार का विधि द्वारा विनियमन किया जाना-
इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों की कोई बात नागरिकता के अर्जन और समाप्ति के तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में उपबंध करने की संसद की शक्ति का अल्पीकरण नहीं करेगी|
व्याख्या-
नागरिकता के अर्जन व समाप्ति के संबंध में कानून/ विधि बनाने का अधिकार संसद को है|
अनुच्छेद 5, 6, 7, 8, 9, 10 के उपबंध संसद की शक्ति (नागरिकता संबंधी) का अल्पीकरण नहीं करेंगे|
Note-
नागरिकता के अधिकार को संसद द्वारा पारित विधि के अलावा अन्य किसी रीति से नहीं छीना जा सकता|- इब्राहिम वजीर बनाम स्टेट ऑफ बॉम्बे, वाद 1952
भारतीय विधि में एकमात्र अधिवास की व्यवस्था है और वह है भारत का अधिवास|- प्रदीप बनाम स्टेट ऑफ यूनियन 1989

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