अनुच्छेद- 3 नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन-
- संसद विधि द्वारा-
किसी राज्य में से उसका राज्यक्षेत्र अलग करके अथवा दो या अधिक राज्यों को या राज्यों के भागों को मिलाकर अथवा किसी राज्यक्षेत्र को किसी राज्य के भाग के साथ मिलाकर नए राज्य का निर्माण कर सकेगी;
किसी राज्य का क्षेत्र बढ़ा सकेगी;
किसी राज्य का क्षेत्र घटा सकेगी;
किसी राज्य की सीमाओं में परिवर्तन कर सकेगी;
किसी राज्य के नाम में परिवर्तन कर सकेगी|
व्याख्या-
यह अनुच्छेद संसद को निम्न शक्ति प्रदान करता है, जो संसद विधि बना कर कर सकती हैं-
नये राज्यों का निर्माण- संसद विधि बनाकर निम्न तरह से नया राज्य बना सकती है-
किसी राज्य में उसका राज्य क्षेत्र अलग करके
दो या दो से अधिक राज्यों और राज्यों के भागों को मिलाकर
किसी राज्य क्षेत्र को किसी राज्य के भाग के साथ मिलाकर
किसी राज्य के क्षेत्र को बढ़ाना
किसी राज्य के क्षेत्र को घटाना
किसी राज्य की सीमाओं में परिवर्तन करना
किसी राज्य के नाम में परिवर्तन करना
परंतुक-
इस प्रयोजन के लिए कोई भी विधेयक राष्ट्रपति के सिफारिश के बिना संसद में नहीं रखा जा सकता है| (7 वें संविधान संशोधन अधिनियम 1956 की धारा 2 के द्वारा प्रतिस्थापित)
संबंधित राज्य के विधानमंडल के विचार भी जानना जरूरी है| यह विचार राज्य विधान मंडल द्वारा निर्देश में तय समयाविधि या राष्ट्रपति द्वारा तय अतिरक्त समयाविधि में देना आवश्यक है| (7 वें संविधान संशोधन अधिनियम की धारा 29 के द्वारा राज्य के अंतर्गत भाग क व ख शब्दों का विलोप)
राष्ट्रपति राज्य विधानमंडल का मत मानने के लिए बाध्य नहीं है|
नोट- लेकिन ध्यान रहे कि यह केवल राज्य के संबंध में लागू है, संघ राज्य क्षेत्र के संबंध में नही|
स्पष्टीकरण 1-
इस अनुच्छेद के खंड (a) से खंड (e) में उल्लेखित राज्य के अंतर्गत राज्य व संघ राज्य क्षेत्र दोनों आते हैं| किंतु परंतुक में राज्य के अंतर्गत संघ राज्य क्षेत्र नहीं है| (18वें संविधान संशोधन अधिनियम 1966 की धारा 2 द्वारा अंत:स्थापित)
स्पष्टीकरण 2-
खंड (क) द्वारा संसद को प्रदत शक्ति के अंतर्गत किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के किसी भाग को किसी अन्य राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के साथ मिलाकर नए राज्य या संघराज्य क्षेत्र का निर्माण करना है|
Note-
इस अनुच्छेद के अंतर्गत संसद किसी भी राज्य व संघराज्य क्षेत्र का विभाजन, गठन, पुनर्गठन, एकीकरण, पुन: एकीकरण आदि कर सकती है|
डॉ सुब्रहमण्यम बनाम गवर्नमेंट ऑफ इंडिया वाद, 2014 आंध्र प्रदेश-
आंध्रप्रदेश का विभाजन असंवैधानिक नहीं है, क्योंकि यह-
सम्यक विधिक प्रक्रिया द्वारा किया गया है,
विधि के अनुरूप किया गया है, तथा
संविधान में इसका प्रावधान है|

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