Ad Code

अनुच्छेद- 15- धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्म स्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध (सामाजिक समानता)

 

अनुच्छेद- 15-  धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्म स्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध-  (सामाजिक समानता)


  1. राज्य, किसी नागरिक के विरुद्ध केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर कोई विभेद नहीं करेगा|


  • व्याख्या-

  • राज्य किसी भी नागरिक के प्रति केवल 5 आधारों या इनमें से किसी के आधार पर पर कोई विभेद नहीं करेगा, जो निम्न है- 

  1. धर्म, 

  2. मूलवंश, 

  3. जाति, 

  4. लिंग या 

  5. जन्म स्थान


  • 15(1)- इसमें केवल और विभेद दो शब्द आये हैं, जहां केवल का अर्थ राज्य का कोई भी कार्य चाहे वह राजनीतिक, सिविल या अन्य प्रकार का हो केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्म स्थान के आधार पर विभेद नहीं करेगा, इनके अलावा अन्य आधार पर किया जा सकता है|

  • विभेद का अर्थ- विपरीत मामला

  • यह अधिकार केवल नागरिक को प्राप्त है| 



  1. कोई नागरिक केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर-

(क) दुकानों, सार्वजनिक भोजनालयों, होटलों और सार्वजनिक मनोरंजन के स्थानों में प्रवेश, या 

(ख) पूर्णतः या भागतः राज्य-निधि से पोषित या साधारण जनता के प्रयोग के लिए समर्पित कुओं, तालाबों, स्नानघाटों, सड़कों और सार्वजनिक समागम के स्थलों के उपयोग, के सम्बन्ध में किसी भी निर्योग्यता, दायित्व, निर्बन्धन या शर्त के अधीन नहीं होगा| 


  • व्याख्या-

  • 15(2)(क) कोई नागरिक केवल निम्न 5 आधारों (धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान) या इनमें से किसी के आधार पर दुकानों, सार्वजनिक भोजनालयों, होटलों और सार्वजनिक मनोरंजन के स्थानों में प्रवेश के सम्बन्ध में किसी भी निर्योग्यता, दायित्व, निर्बन्धन या शर्त के अधीन नहीं होगा| 

  • 15(2)(ख) कोई नागरिक केवल निम्न 5 आधारों (धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान) या इनमें से किसी के आधार पर पूर्णत या भागत: राज्य निधि से पोषित या साधारण जनता के प्रयोग के लिए समर्पित कुओ, तालाबों, स्नानघाटों, सड़कों और सार्वजनिक समागम के स्थानों के उपयोग के संबंध में किसी भी निर्योग्यता, दायित्व, निर्बंधन या शर्त के अधीन नहीं होगा| 


  • अनुच्छेद 15(2) राज्य एवं प्राइवेट व्यक्ति दोनों के विरुद्ध विभेद का प्रतिषेध करता है, जबकि 15(1) केवल राज्य के विरुद्ध विभेद का प्रतिषेध करता है|



  1. इस अनुच्छेद की कोई बात राज्य को स्त्रियों और बालकों के लिए कोई विशेष उपबन्ध करने से निवारित नहीं करेगी| 


  • व्याख्या-

  • यह अनुच्छेद 15(1) व 15(2) का अपवाद है|

  • अर्थात राज्य स्त्रियों और बालकों के लिए विशेष उपबंध कर सकता है| जिसको अनुच्छेद 15(1) व 15(2) के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती| 


  1. इस अनुच्छेद की या अनुच्छेद 29 के खण्ड (2) की कोई बात राज्य को सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े हुए नागरिकों के किन्हीं वर्गों की उन्नति के लिए या अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए कोई विशेष उपबन्ध करने से निवारित नहीं करेगी|


  • व्याख्या-

  • राज्य सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े हुए नागरिकों के किन्हीं वर्गों की उन्नति के लिए तथा अनुसूचित जातियों व अनुसूचित जनजातियों के लिए विशेष उपबंध कर सकता है| जिसको अनुच्छेद 15 व अनुच्छेद 29(2) के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती| 

  • यह अनुच्छेद 15(1), 15(2) व 29(2) का अपवाद है|

  • यह व्यवस्था चम्पाकम दोरायजन वाद के बाद प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम 1951 की धारा 2 के द्वारा की गयी|

  • चम्पाकम दोरायजन बनाम मद्रास राज्य वाद 1951 के मामले में मद्रास सरकार के सांप्रदायिक आदेश (जातिगत आरक्षण) को रद्द किया गया तथा चम्पाकम वाद में दिए गए निर्णय के प्रभाव को समाप्त करने हेतु प्रथम संविधान संशोधन 1951 के द्वारा अनुच्छेद 15(4) जोड़ा गया|



  1. इस अनुच्छेद या अनुच्छेद 19 के खण्ड (1) के उपखण्ड (छ) की कोई बात राज्य को सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े हुए नागरिकों के किन्हीं वर्गों की उन्नति के लिए या अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों के लिए, विधि द्वारा, कोई विशेष उपबन्ध करने से निवारित नहीं करेगी, जहाँ तक ऐसे विशेष उपबन्ध, अनुच्छेद 30 के खण्ड (1) में निर्दिष्ट अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थाओं से भिन्न, शिक्षा संस्थाओं में, जिनके अन्तर्गत प्राइवेट शिक्षा संस्थाएँ भी हैं, चाहे वे राज्य से सहायता प्राप्त हों या नहीं, प्रवेश से सम्बन्धित हैं| 


  • व्याख्या-

  • अनुच्छेद 30(1) मे संदर्भित अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं को छोड़कर, सरकारी व निजी सभी प्रकार की संस्थाओं (चाहे वे राज्य से सहायता प्राप्त हों या नहीं) मे सामाजिक व शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के नागरिकों, SC व ST के लिए प्रवेश में छूट के संबंध राज्य कानून बना सकता है| 

  • जो अनुच्छेद 15 व 19(1) छ का उल्लंघन नहीं होगा| 

  • यह अनुच्छेद 15(1), 15(2) व 19(1) छ का अपवाद है|

  • यह प्रावधान 93 वे संविधान संशोधन अधिनियम 2005 की धारा 2 द्वारा जोड़ा गया| 

  • अनुच्छेद 15(5) के क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय शैक्षणिक संस्था (प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम 2006 पारित किया गया, जिसके अंतर्गत पिछड़े वर्गों को सभी उच्च शैक्षणिक संस्थानों में (I IT, I I M) 27% आरक्षण दिया गया|

  • 2008 में उच्चतम न्यायालय ने इसको वैध माना तथा आदेश दिया कि क्रीमीलेयर के सिद्धांत का पालन करें|



  1. इस अनुच्छेद या अनुच्छेद 19 के खण्ड (1) के उपखण्ड (छ) या अनुच्छेद 29 के खण्ड (2) की कोई बात, राज्य को

(क) खण्ड (4) और खण्ड (5) में उल्लिखित वर्गों से भिन्न नागरिकों के आर्थिक रूप से दुर्बल किन्हीं वर्गों की उन्नति के लिए कोई भी विशेष उपबन्ध करने से निवारित नहीं करेगी; और 

(ख) खण्ड (4) और खण्ड (5) में उल्लिखित वर्गों से भिन्न नागरिकों के आर्थिक रूप से दुर्बल किन्हीं वर्गों की उन्नति के लिए कोई भी विशेष उपबन्ध करने से वहाँ निवारित नहीं करेगी जहाँ तक ऐसे उपबन्ध, ऐसी शैक्षणिक संस्थाओं में, जिसके अन्तर्गत अनुच्छेद 30 के खण्ड (1) में निर्दिष्ट अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाओं से भिन्न प्राइवेट शैक्षणिक संस्थाएँ भी हैं, चाहे वे राज्य द्वारा सहायता पाने वाली हैं या सहायता न पाने वाली हैं, प्रवेश से सम्बन्धित हैं, जो आरक्षण की दशा में विद्यमान आरक्षण के अतिरिक्त तथा प्रत्येक प्रवर्ग में कुल स्थानों के अधिकतम दस प्रतिशत के अध्यधीन होगा|


  • व्याख्या-

  •  15(6)(क)- खंड(4) और खंड(5) में उल्लेखित वर्गों से भिन्न आर्थिक रूप से दुर्बल किन्ही वर्गों की उन्नति के लिए राज्य कोई विशेष उपबंध कर सकता है| जो अनुच्छेद 15 या अनुच्छेद 19(1)(छ) या अनुच्छेद 29(2) का उल्लंघन नहीं माना जाएगा| 

  • 15(6)(ख)- राज्य अनुच्छेद 30(1) में संदर्भित अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं को छोड़कर, सभी सरकारी व निजी संस्थाओं में खंड(4) और खंड(5) में उल्लेखित वर्गों से भिन्न आर्थिक रूप से दुर्बल किन्ही वर्गों की उन्नति के लिए प्रवेश में अधिकतम 10% आरक्षण का प्रावधान कर सकेगा|  जो अनुच्छेद 15 या अनुच्छेद 19(1)(छ) या अनुच्छेद 29(2) का उल्लंघन नहीं माना जाएगा| 


  • Note- 15(6) क व ख में उल्लेखित वर्ग 15(4) व 15 (5) में उल्लेखित वर्ग से भिन्न होगा|

  • Note- 15(6) का प्रावधान 103 वां संविधान संशोधन अधिनियम 2019 की धारा 2 के द्वारा जोड़ा गया|

 


Note- 

  • अनुच्छेद 15(3), 15(4), 15( 5), 15(6) इस अनुच्छेद 15(1) व (2) का अपवाद है|

  • साइमन कमीशन ने 1929 में आदिम जाति को ST व हरिजन व दलितों को SC कहा, जो आज भी संविधान में है| 


स्पष्टीकरण- इस अनुच्छेद और अनुच्छेद 16 के प्रयोजनों के लिए “आर्थिक रूप से दुर्बल वर्ग” वे होंगे, जो राज्य द्वारा कुटुम्ब की आय और आर्थिक अलाभ के अन्य सूचकों के आधार पर समय-समय पर अधिसूचित किए जाएँ| 



प्रमुख वाद-

  1. आरक्षण की संवैधानिक अवधारणा- संविधान की उद्देशिका के साथ ही साथ मौलिक अधिकार, राज्य के नीति निदेशक तत्वों के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 39क में अनुचिंतित आरक्षण की संवैधानिक अवधारणा समाज के सभी वर्गों को समान अवसर प्रदान करने की अवधारणा को प्राप्त करना है|- राम कुमार गिजरौया बनाम दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड वाद 2016


  1. अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों और समाज के शैक्षिक रूप से और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों को आरक्षण प्रदान करने का उद्देश्य लोक नियोजन में असमानता को समाप्त करना है|- राम कुमार गिजरौया बनाम दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड वाद 2016

 

  1. उच्चतम न्यायालय ने धारित किया है कि जाति, पिछड़ी जाति का निर्धारण करने के लिए एक सुसंगत कसौटी है| परन्तु इसे लागू करना बाध्यकर नहीं है|- चित्रलेखा बनाम स्टेट ऑफ मैसूर वाद 1964 


  1. अनुच्छेद 14, 15 व 16 के तहत लैंगिक समता का अधिकार है|- शोभा देवी बनाम जोधपुर विद्युत वितरण लिमिटेड वाद 2022 




Notes available for RPSC School lecturers and UGC-Net Political Science Subject 9660895656

Nirban Classes 📞 Call Support- 9660-895656 (Nirban P K Sir) 💬 Whatsapp- 9660-895656 (Nirban P K Sir) 👉App link-- https://play.google.com/store/apps/details?id=co.sansa.dinxk 👉Website link-- https://www.nirbanclasses.com/ 👉Telegram link-- https://t.me/nirbanclasses/

Close Menu