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अनुच्छेद 25- अंतः करण की और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता

     

    अनुच्छेद 25- अंतः करण की और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता-


    • यह अनुच्छेद धर्म की स्वतंत्रता से संबंधित है, जिसको आयरलैंड के संविधान से लिया गया है|


    अनुच्छेद 25(1)-

    लोक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य तथा इस भाग के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, सभी व्यक्तियों को अंतः करण की स्वतंत्रता का और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का समान हक होगा|

    व्याख्या-

    • अनुच्छेद 25 (1) व्यक्ति को चार प्रकार की स्वतंत्रता प्रदान करता है-

    1. अंतः करण की स्वतंत्रता- किसी व्यक्ति को भगवान के साथ अंतर्संबंध बनाने की स्वतंत्रता होगी|

    2. धर्म को अबाध रूप से मानने की स्वतंत्रता- व्यक्ति बिना भय व बाधा के जिस धर्म को मानना चाहता है, उसको मान सकता है अर्थात व्यक्ति अपना धर्म बदल सकता है|

    3. आचरण की स्वतंत्रता- सभी व्यक्तियों को अपने धर्म के अनुसार आचरण की स्वतंत्रता है, अर्थात धार्मिक पूजा, परंपरा, समारोहों करने की स्वतंत्रता है|

    4. प्रचार का अधिकार- सभी व्यक्तियों को अपनी धार्मिक आस्थाओं व सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार करने का अधिकार है, लेकिन किसी व्यक्ति को अपने धर्म में धर्मान्तरित करने का अधिकार नहीं है|


    • प्रोफेसर रेव स्टेनस्लास वाद 1977- सुप्रीम कोर्ट ने इसमें निर्णय दिया कि धार्मिक स्वतंत्रता में किसी का धर्म परिवर्तन कराना नहीं आता है|


    • प्रतिबंध- इन स्वतंत्रताओं पर निम्न 4 प्रतिबंध/ बंधन है-

    1. लोकव्यवस्था

    2. सदाचार

    3. स्वास्थ्य

    4. मौलिक अधिकारों के अन्य प्रावधान


    अनुच्छेद 25(2)-

    इस अनुच्छेद की कोई बात किसी ऐसी विद्यमान विधि के प्रवर्तन पर प्रभाव नहीं डालेगी या राज्य को कोई ऐसी विधि बनाने से निवारित नहीं करेगी जो-

    (क) धार्मिक आचरण से सम्बन्ध किसी आर्थिक, वित्तीय, राजनीतिक या अन्य लौकिक क्रियाकलाप (Other Secular Activity) का विनियमन या निर्बन्धन करती है;

    (ख) सामाजिक कल्याण और सुधार के लिए या सार्वजनिक प्रकार की हिन्दुओं की धार्मिक संस्थाओं को हिन्दुओं के सभी वर्गों और अनुभागों के लिए खोलने का उपबन्ध करती है|


    व्याख्या-

    • अनुच्छेद 25(2) अनुच्छेद 25(1) अपवाद है| 

    • निम्न विद्यमान विधि लागु रहेगी तथा राज्य को निम्न बातों पर विधि बनाने से नहीं रोका जाएगा [अनुच्छेद 25(1) के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती]-

    (क) धार्मिक आचरण से सम्बद्ध किसी आर्थिक, वित्तीय, राजनीतिक या अन्य लौकिक क्रियाकलाप (Other Secular Activity) का विनियमन या निर्बधन करना|

    (ख) सामाजिक कल्याण और सुधार के लिए या सार्वजनिक प्रकार की हिंदुओं की धार्मिक संस्थाओं को हिंदुओं के सभी वर्गों या अनुभागों के लिए खोलना|


    • Note- उद्देशिका के अतिरिक्त केवल अनुच्छेद 25(2) में सेकुलर शब्द प्रयुक्त किया गया है, लेकिन  25(2) में सेकुलर शब्द का हिंदी अर्थ पंथनिरपेक्ष की जगह लौकिक लिया गया है| 


    स्पष्टीकरण- 1

    • कृपाण धारण करना और लेकर चलना सिख धर्म को मानने का अंग समझा जाएगा| 

    • संविधान निर्माताओ ने कृपाण धारण करने के प्रावधान को मोतीलाल नेहरू समिति 1928 की अनुशंसा से लिया था| 


    स्पष्टीकरण- 2 

    • अनुच्छेद 25 के खंड (2) के उपखंड (ख) में हिंदुओं शब्द में सिख, जैन, बौद्ध भी शामिल है| (प्रथम संशोधन 1951)


    • एस. आर. बोम्मई बनाम यूनियन ऑफ इंडिया वाद 1994- न्यायालय ने निर्णय दिया कि धर्मनिरपेक्षता संविधान का एक आधारभूत लक्षण है|  


    एस. आर. बोम्मई बनाम यूनियन ऑफ इंडिया वाद (1994)-

    • 1989 में कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री एस. आर. बोम्मई की सरकार को राज्यपाल ने बहुमत परीक्षण का अवसर दिए बिना बर्खास्त कर दिया था और राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया था|

    • इसके अलावा 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान की भाजपा सरकारों को भी अनुच्छेद 356 के तहत बर्खास्त कर दिया गया| 

    • इन मामलों को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई, जिस पर 1994 में नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अपना फैसला सुनाया| 


    • प्रमुख निर्णय-

    • सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) के तहत राज्य सरकारों को मनमाने ढंग से बर्खास्त किए जाने पर कड़े प्रतिबंध लगाए| 

    • सर्वोच्च न्यायालयने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति की संतुष्टि और राष्ट्रपति शासन की घोषणा की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है| 

    • बहुमत का फैसला राज्यपाल की व्यक्तिगत रिपोर्ट पर नहीं, बल्कि विधानसभा के पटल पर होना चाहिए|

    • सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला दिया कि संघवाद और पंथनिरपेक्षता (Secularism) भारतीय संविधान के मूल ढांचे (Basic Structure) का हिस्सा हैं| 



    चर्च ऑफ गॉड ऑफ इंडिया बनाम K.K.R मेजस्टिक कॉलोनी वेलफेयर एसोसिएशन मामला 2000-

    • कोई धर्म यह नहीं कहता कि दूसरे व्यक्ति की शांति में व्यवधान उत्पन्न करके प्रार्थना, पूजा-पाठ, संपादित की जानी चाहिए, न हीं कोई धर्म यह आदेश देता है कि लाउडस्पीकर, वॉइस एंपलीफायर अथवा ढोल नगाड़ा पीट कर प्रार्थना या पूजा पाठ करें|

    अरुणा राय बनाम यूनियन ऑफ इंडिया वाद 2002-

    • न्यायालय ने निर्णय दिया कि विद्यालयी शिक्षा में धार्मिक शिक्षा का अध्ययन, संविधान के पंथनिरपेक्ष भावना के विरुद्ध प्रयत्न नहीं कहा जा सकता है| 

    इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन बनाम केरल राज्य वाद 2018-

    • इस वाद में अनुच्छेद 25 के आधार पर केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक को न्यायालय ने असंवैधानिक बतलाया|

     



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