व्याख्या-
14 वर्ष से कम आयु के किसी बालक को किसी कारखाने या खान तथा अन्य परिसंकटमय कार्य में नियोजित नहीं किया जाएगा|
14 वर्ष से कम आयु के किसी बालक का रेल या पतन में भी नियोजन नहीं हो सकता|
Note- इस अनुच्छेद द्वारा अधिरोपित प्रतिषेध आत्यंतिक है, अर्थात इस अनुच्छेद का कोई अपवाद नहीं है|
यह किसी व्यक्ति को न केवल राज्य के खिलाफ बल्कि व्यक्तियों के खिलाफ भी सुरक्षा प्रदान करता है|
बालश्रम (प्रतिषेध एवं नियमन) अधिनियम 1986-
यह प्रावधान करता है, कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों में नहीं लगाया जाएगा| इस अधिनियम को 2003 में संशोधित किया गया|
बंधुआ मुक्ति मोर्चा बनाम भारत संघ वाद 1997-
यह वाद बाल श्रम का प्रतिषेध करता है|
इसमें सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि गलीचा उद्योग में अल्पआयु बच्चों से काम नहीं करवाया जा सकता है, क्योंकि उनके पास शिक्षा के साथ-साथ अच्छे स्वास्थ्य का भी मूल अधिकार था|
बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005-
यह अधिनियम बालकों के अधिकारों के संरक्षण के लिए एक राष्ट्रीय आयोग और राज्य आयोगों की स्थापना का प्रावधान करता है|
फलस्वरुप 2007 में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग बनाया गया| यह आयोग संसदीय अधिनियमों से बना वैधानिक आयोग है| इसमें बालक की परिभाषा 0 से 18 वर्ष तक के बालक हैं|
2006 में सरकार ने बच्चों के घरेलू नौकर के रूप में तथा व्यवसायिक प्रतिष्ठानों (होटल, रेस्टोरेंट्स, दुकान, रसोई, स्पा, चाय की दुकानें आदि) में नियोजन पर रोक लगा दी है|
बचपन बचाओ आंदोलन बनाम भारत संघ वाद (2011)-
इस वाद में न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया कि वह बच्चों को शोषण और बाल श्रम से बचाने के लिए सख्त कदम उठाए और उन्हें शिक्षा का अधिकार प्रदान करे|
इस मामले में बच्चों को बाल श्रम, शोषण और बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराने तथा उनके पुनर्वास और शिक्षा के अधिकार पर जोर दिया गया|
इस वाद के संवैधानिक आधार-
अनुच्छेद 21A- 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा
अनुच्छेद 24- 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों, खानों या अन्य जोखिमपूर्ण कार्यों में नियोजित करने का निषेध
अनुच्छेद 39(e) एवं 39(f)- बच्चों की सुकुमार अवस्था, स्वास्थ्य, शक्ति, गरिमा और विकास की सुरक्षा
बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act)-
POCSO का पूरा नाम- Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012
हिंदी में- बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम, 2012
अधिनियम के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु का कोई भी व्यक्ति बालक है|
मूल उद्देश्य- 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को लैंगिक हमला, लैंगिक उत्पीड़न तथा अश्लील/ पोर्नोग्राफिक अपराधों से संरक्षण प्रदान करना है|
बाल श्रम संशोधन अधिनियम 2016-
इसके द्वारा 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सभी प्रकार के व्यवसायों में नियोजन पर रोक लगा दी है, केवल दो परिस्थितियों में कुछ शर्तों के साथ छूट दी गई है-
यदि बच्चा स्कूल के समय के बाद अपने पारिवारिक व्यवसाय में मदद करता है, लेकिन वह कोई खतरनाक कार्य नहीं हो|
यदि बच्चा कलाकार के रूप में ऑडियो-वीडियो मनोरंजक उद्योग या किसी खेलकूद संबंधी क्रियाकलाप (सर्कस को छोड़कर) में नियोजित हो, लेकिन वह कार्य जोखिम भरा न हो|

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